टीकाकरण महा अभियान के अंतर्गत आज छिंदवाड़ा ने बनाया रिकॉर्ड

 टीकाकरण महा अभियान के अंतर्गत आज छिंदवाड़ा ने बनाया रिकॉर्ड  एक दिन में 40 हजार 121  नागरिको को लगाया कोविडशील्ड का प्रथम एव सेकंड डोज  टीकाकरण महाअभियान के अंतर्गत कलेक्टर श्री सौरभ कुमार सुमन और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री गजेंद्र सिंग नागेश के मार्गदर्शन में जिले टीकाकरण का कार्य निरंतर प्रगति पर है तहा शनिवार को इसमें रिकॉर्ड उपलब्ध हाशिल  की गई।   इस महाअभियान के अंतर्गत शनिवार को 37500 के लक्ष्य के विरुद्ध जिले के 179 टीकाकरण केन्द्रो के माध्यम से   एक दिन में 40 हजार 121  नागरिको को लगाया कोविडशील्ड का प्रथम एव सेकंड डोज लगाए गए। 

श्री कमलनाथ जी का जीवन परिचय

 श्री कमलनाथ जी का जीवन परिचय 

श्री कमलनाथ जी का जीवन परिचय


श्री  कमलनाथ जी का जन्म 18 नवम्बर 1946 को कानपूर में एक सम्पन्न औद्योगिक घराने में हुआ। प्रारम्भिक शिक्षा हिमालय की तराई में स्थित ख्यातिमान दून स्कूल में हुई। इसके बाद वे कलकत्ता के सेन्ट जेवियर कॉलेज आ गये यहाँ उन्होंने वाणिज्य में उपाधि प्राप्त की इसके बाद वे एक युवा कार्यकर्त्ता के रूप में 1968 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ गये। 27 जनवरी 1973 को श्री कमलनाथ , अलका जी के साथ वैवाहिक सूत्र में बंध गये। उनके दो पूत्र श्री नकुलनाथ तथा श्री बकुलनाथ है। 

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                                                     श्री कमलनाथ जी की सक्रियता एव असाधारण प्रतिभा में कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व अत्यंत प्रभावित था। कांग्रेस की कार्यसमिति विशेषकर श्रीमती इंदिरा गाँधी की पहल पर 1979 में छिन्दवाड़ा संसदीय क्षेत्र से उन्हें टिकट दिया।  श्री कमलनाथ ने अपनी विश्व प्रसिद्ध पुस्तक इंडियास सेंचुरी (भारत की शताब्दी ) में जो उन्होंने अपने पिता स्वर्गीय श्री महेंद्रनाथ एव माता स्वर्गीय श्रीमती लीलाजी को समर्पित की है।  

उसके एक अध्याय में  अपने छिंदवाड़ा के प्रथम आगमन का बहुत मार्मिक चित्रण किया है।  उन्होंने 12 हजार  वर्ग किलोमीटर में विस्तृत इस क्षेत्र का सघन दौरा किया , तो यहाँ के लोगो की दशा ने उन्हें विचलित कर दिया इस क्षेत्र के 2000 से अधिक गांवो में से अनेक गांव पहाड़ी एव दुर्गम क्षेत्रो में बसे है।  सम्पन्नता के  परिवेश में पले - बढे श्री कमलनाथ का सामना कृशकाय , रोगी ,  जर्जर और लाचार किन्तु आस्था एव विश्वास के साथ जय बोलते ग्रामीणों से हुआ।  यहाँ कठिनायों से संघर्ष करते किशानो को देखकर वे व्यथित हो गये। दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों की सम्पन्नता की तुलना में भारत में बसे इस क्षेत्र की  विपन्नता ने उन्हें झकझोर दिया। 

उन्हें तब और आश्चर्य हुआ , जब ये ग्रामीण उन्हें अपने बीच पा कर उत्साहित थे और उनसे मात्र अपेक्षा कर रहे थे की निर्वाचित होने के पश्चात वे उनके पास आते रहे श्री नाथ ने भी उन्हें भोले भाले ग्रामीण को भरोसा दिलाया की वे उनकी उम्मीदों पर खरा उतरेंगे। श्री कमलनाथ अपने इस आश्वासन को 1980 से आज तक न केवल निभाते आ रहे है , बल्कि यहाँ के छोटे छोटे गांव शिकारपुर में उन्होंने अपना बसेरा भी बना लिया है।  

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